हल्दी या अमृत ? Turmeric or Nectar ?

भारतीय मसाले(Spices) सदियों से लोगों को भारत ही नहीं भारत से बाहर भी आकर्षित करते रहे हैं, हल्दी(Turmeric) भी एक ऐसा ही मसाला है। कुछ दशक पहले तक हल्दी को केवल एक मसाले के रूप में मान्यता मिलती थी जिसका इस्तेमाल खाने में रंग के लिए किया जाता है। पर पिछले एक दशक में हल्दी के स्वास्थ्यकारी फ़ायदों को विदेशों में भी माना जाने लगा है और इसके स्वास्थ्य लाभों को देख कर लोग हल्दी को फूड सप्लीमेंट(Food Supplement mainly Curcumin) और दवाई के रूप में भी लेने लगे हैं। तो आइये देखते हैं ऐसा क्या खास है इस पीले रंग के मसाले में जिसको भारत में सदियों से दवाई के रूप में मान्यता मिली हुई है

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एंटीसेप्टिक(Antiseptic) गुणों की खान

हल्दी को इसके एंटीसेप्टिक गुणों के लिए भारत में सदियों से मान्यता मिली हुई है, पर अब वैज्ञानिक भी यह मानने लगे हैं कि हल्दी को चोटों पर लगाने और खाने से चोटें ठीक करने में मदद मिलती है। शायद अब आप जान गए होंगे गाँवों में चोट लगने पर हल्दी तेल का लेप और हल्दी वाला दूध क्यों पीया और पिलाया जाता है।

उम्र का असर कम करती है(Anti-ageing Property)

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हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट्स(Antioxidants) गुणों की भरमार है जिसे कारण यह उम्र बढ्ने के दौरान आने वाली समस्याओं में बहुत अधिक मदद कर सकती है। इसके नियमित इस्तेमाल के द्वारा त्वचा की झुर्रियों(Skin Wrinkles) और हड्डियों संबंधी समस्याओं(Bone Problems) को होने से रोकने में मदद मिल सकती है। हल्दी के इन गुणों के लिए इसके सेवन के साथ साथ लेप के रूप में इस्तेमाल करना लाभकारी हो सकता है।

मस्तिष्क संबंधी बीमारियों(Brain Diseases) की रोकथाम

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हल्दी में उपस्थित करक्यूमीन(Curcumin) रक्त और मस्तिष्क के बीच की दूरी को भी भेदने की क्षमता रखता है जिसके नियमित सेवन से मस्तिष्क को स्वस्थ रखने और क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। यह अल्जाइमर्स(Alzheimers) जैसी बीमारियों को होने से रोकता है।

ह्रदय विकारों(Heart Problems) में लाभ

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हल्दी में उपस्थित करक्यूमीन ह्रदय को रक्त लाने और वहाँ से लाने वाली रक्त नलिकाओं(Blood Vessels) को स्वस्थ रखने में मदद करता है, जिससे नलिकाओं में रक्त के थक्के जमना(Clotting) रोकने और उनके अंदर रक्त दाब(Blood Pressure) को नियमित करने में भी मदद करता है। इस प्रकार यह ह्रदय से संबन्धित बीमारियों के एक मुख्य कारण को रोकने में भी मदद करता है।

कैंसर(Cancer) रोकथाम में सहायक

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हल्दी के रोग प्रतिरोधी गुणों के बारे में जागरूकता तब अधिक हुई जब अमेरिका की कुछ कंपनियों ने हल्दी का पेटेंट(Patent) कराने की कोशिश की, और यह पाया गया कि हल्दी कैंसर को रोकने में सहायक तो है ही साथ ही इसका इस्तेमाल कैंसर की दवा के रूप में भी किया जा सकता है। हल्दी से प्रोस्टेट कैंसर(Prostate Cancer), ब्लड कैंसर(Blood Cancer), स्किन कैंसर(Skin Cancer) और ट्यूमर्स(Tumors) को खत्म करने में तो मदद मिलती ही है साथ ही शोध से यह भी पता चलता है कि कैंसर की कीमोथैरेपी(Chemotherapy) में हल्दी के गुण मिल जाने पर यह कैंसर के खिलाफ और अधिक प्रभावकारी हो जाती है।

आँखों के लिए लाभदायक

हल्दी के गुण आँखों के लिए भी बहुत अधिक लाभकारी हैं। आँखों के रेटिना(Retina) से संबंधित उन सभी बीमारियों में जिनमें आँखों की रोशनी जाने का खतरा बना रहता है, हल्दी का उपयोग करने से लाभ मिलता है।

वजन कम करना(Weight Loss)

हल्दी में उपस्थित करक्यूमीन(Curcumin) से वजन कम करने में भी मदद मिलती है। हल्दी में करक्यूमीन होने के कारण यह हमारे जीन्स(Genes) जोकि वजन कम करने में मदद करते हैं उनको ट्रिगर(Trigger) करने का काम करती है। इस प्रकार यह वजन कम करने में तब भी लाभदायक होती है जब कि जीन्स में होने वाली गड़बड़ियों के कारण वजन बढ़ा हुआ होता है।

आर्थेराइटिस(Arthritis) में लाभकारी

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आर्थेराइटिस में होने वाला दर्द जानलेवा लगता है और इसमें दर्द कम करने के लिए हल्दी बहुत अधिक लाभदायी हो सकती है। एक शोध से पता चला है कि हल्दी में उपस्थित करक्यूमीन दर्द कम करने के लिए ली जाने वाली ब्रूफेन(Ibrufen) के समान ही काम करती है।

लीवर स्वास्थ्य(Liver Health) के लिए रामबाण

हल्दी एक प्राकृतिक लीवर शोधक(Liver Detoxifier) है जोकि शराब से हुए नुकसान को भी ठीक करने में सक्षम है। अधिक वसा वाला खाना खाने से हुए लीवर को हुए नुकसान(Fatty Liver) को भी हल्दी ठीक करने में मददगार हो सकती है।

सोरियासिस(Psoriasis) का प्राकृतिक उपचार

नेशनल सोरियासिस फ़ाउंडेशन(National Psoriasis Foundation) के अनुसार हल्दी को सोरियासिस के इलाज के तौर पर एक प्राकृतिक दवाई के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। सोरियासिस के लिए हल्दी के सेवन की सलाह दी जाती है।

अवसाद(Dipression) में लाभकारी

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हल्दी के इस गुण को सही साबित करने के लिए कई शोध गवाही देते हैं। अवसाद के लिए प्रोजॅक(Prozac) नामक दवाई का इस्तेमाल किया जाता रहा है और शोध में पता लगा है कि हल्दी में उपस्थित करक्यूमीन प्रोजॅक के समान ही असर करती है और किसी प्रकार के दुष्प्रभाव भी देखने को नहीं मिलते हैं।

अच्छी नींद(Good Sleep)

हल्दी अच्छी नींद आने में मदद करती है साथ ही नींद ना आने के कारण शरीर में होने वाले बुरे प्रभावों को कम करने में भी मदद कर सकती है। चूहों पर किए गए प्रयोगों में 72 घण्टों तक जागे चूहों के शरीर पर पड़े बुरे प्रभावों को पलटने में कामयाबी मिली है।

डायबिटीज(Diabetes) में लाभकारी

हल्दी का उपयोग इंसुलिन प्रतिरोध(Insulin Resistance) को कम करने के साथ ही शरीर में ब्लड शुगर(Blood Sugar) की बढ़ी हुई मात्रा को भी कम करने में मदद कर सकता है। डायबिटीज के लिए करक्यूमीन एक रामबाण साबित हो सकता है पर उसके लिए और अधिक शोधों की आवश्यकता है।

ऊपर दिये गए स्वास्थ्य लाभों के अलावा भी हल्दी के गुणों पर चल रहे शोध इस लिस्ट में और लाभों को जोड़ने का काम कर रहे हैं, ऐसे में हल्दी के इन लाभों का फायदा उठाइए और स्वस्थ(Healthy) रहिए।

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7 thoughts on “हल्दी या अमृत ? Turmeric or Nectar ?”

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