डायबिटीज क्या है? What is Diabetes?

भारत  में 68 मिलियन लोग डायबिटीज(Diabetes) से पीड़ित हैं और भारत को डायबिटीज कैपिटल ऑफ वर्ल्ड(Diabetes Capital of World) कहा जाने लगा है जिसका कारण यह है की यहाँ पर डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार 2040 तक मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। इस सब में एक भयावह बात यह है कि लगभग 77 मिलियन लोग प्री डायबिटिक(Pre-Diabetic) हैं जिसका मतलब यह है की अगर इन लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो जल्दी ही ये लोग भी डायबिटीज के शिकार हो जाएँगे।

        इन सभी डरावनी बातों में एक खुशी की बात यह है कि यदि प्री डायबिटिक लोग अपनी दिनचर्या सुधारें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें तो डायबिटीज से बच सकते हैं। ऐसे में डायबिटीज  के बारे में जानकारी ही लोगों को इस समस्या से बचा सकती है, तो आइये जानते हैं डायबिटीज क्या है…..

डायबिटीज क्या है?

डायबिटीज सामान्य तौर पर हमारे ब्लड में शुगर की मात्रा का अधिक होना है जिसके कारण हमारे शरीर को अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, साथ ही ये अन्य कई बीमारियों का कारण भी बन सकता है। लेकिन ये सब तभी होता है यदि आप डायबिटीज के बारे में जानते नहीं हैं और इसका सही प्रकार इलाज़ नहीं करवाते अथवा सही लाइफ़स्टाइल नहीं फॉलो करते।

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डायबिटीज का पता कैसे लगाया जाता है?

डायबिटीज का पता लगाने के लिए आप सभी जानते होंगे कि ब्लड टैस्ट किया आता है पर क्या आप जानते हैं कि ये टैस्ट एक दो नहीं बल्कि चार तरह से किए जाते हैं और डायबिटीज का पता लगाने में हमारी मदद करते हैं। ये चार टैस्ट हैं:

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खाली पेट ग्लूकोज टैस्ट(Fasting Glucose Test)

ये टैस्ट सुबह  खाली पेट किया जाता है तथा ब्लड(Blood) लेकर उसमें शुगर(Sugar) का पता लगाया जाता है। यदि एक बार से अधिक  इसकी रीडिंग 126 mg/dl या फिर इससे अधिक आती है तो यह डायबिटीज है।

आकस्मिक बिना खाली पेट ग्लूकोज टैस्ट(Random Glucose Test)

यह टैस्ट बिना भूखे रहे दिन के किसी भी समय किया जाता है और ब्लड ग्लूकोज(Glucose) की मात्रा का पता लगाया जाता है। इस टैस्ट की रीडिंग 200 mg/dl से कम होनी चाहिए। यदि यह 200 या इससे अधिक है तो यह डायबिटीज की संभावना है।

ओरल ग्लूकोज टोलरेंस टैस्ट(Oral Glucose Tolerance Test)

यह टैस्ट लगभग 8 घंटे भूखे(Fasting) रहने के बाद किया जाता है। इसमें एक ग्लूकोस लिक्विड (Glucose Liquid) पीने को दिया जाता है जिसमें 75 ग्राम ग्लूकोज होता है। इसके 1, 2 और 3 घंटे बाद ब्लड टैस्ट किया जाता है। यदि 2 घंटे से पहले वाले सभी टैस्ट में ग्लूकोज लेवल 200 mg/dl से कम हो और 2 घंटे बाद वाले टैस्ट में शुगर लेवल 140 mg/dl से कम हो तो यह नॉर्मल कहा जाता है वरना डायबिटीज माना जाता है।

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यह टैस्ट ब्लड में ग्लूकोज लेवल का पिछले 3 महीने का औसत(Average) बताता है। इसकी सामान्य रीडिंग 6.5 होती है किन्तु यदि यह 6.5 से अधिक हो तो  डायबिटीज मानी जाती है।

नोट: यदि ऊपर दिये गए कोई भी दो टैस्ट दो अलग अलग दिन किए जाएँ और दोनों डायबिटीज की तरफ इशारा करें तो यह बात पक्की हो जाती है कि डायबिटीज है।

डायबिटीज के प्रकार

यह  तीन प्रकार की होती है:

टाइप 1 डायबिटीज(Type 1 Diabetes)

इस प्रकार की डायबिटीज में शरीर का प्रतिरोधी तंत्र शरीर में उपस्थित पैंक्रियास(Pancreas) के सेल्स(Cells) को नष्ट कर देता है जोकि इंसुलिन(Insulin) बनाने का काम करती जिसकी वजह से शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जात है। इस प्रकार की डायबिटीज में इंसुलिन लेने की आवश्यकता पड़ती है। यह डायबिटीज बच्चों और युवाओं में अधिक होती है। यह पारिवारिक जीन्स(Genes) की वजह से हो सकती है, इसके अलावा कुछ पर्यावरण संबंधी कारण और इन्फ़ैकशन(infection) भी इसका कारण बन सकते हैं।

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टाइप 2 डायबिटीज(Type 2 Diabetes)

इस प्रकार की डायबिटीज में इंसुलिन के बनने के बाद भी बॉडी सही प्रकार से काम नहीं करती  और धीरे धीरे यह इंसुलिन की कमी के रूप में शरीर को प्रभावित करती है। इस प्रकार की डायबिटीज में खान-पान को दुरुस्त करके और लाइफ़स्टाइल(Lifestyle) में बदलाव लाकर शरीर को स्वस्थ(Healthy) बनाया जा सकता है, साथ ही दवाइयों का सही इस्तेमाल भी करने की सलाह दी जाती है। यह डायबिटीज खराब खान-पान, मोटापा, पारिवारिक इतिहास, शारीरिक व्यायाम की कमी, उच्च ब्लड प्रैशर(High Blood Pressure), आदि से हो सकती है।

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गर्भावस्था की डायबिटीज(Gestational Diabetes)

इस प्रकार की डायबिटीज गर्भवती महिलाओं को होती है जिसमें दूसरी और तीसरी तिमाही में शुगर लेवल बढ़ जाता है। इस प्रकार की डायबिटीज डिलीवरी के बाद ठीक हो जाती है किन्तु माँ और बच्चे में डायबिटीज के होने की संभावना बढ़ जाती है। यह डायबिटीज पहले गर्भावस्था में हुई डायबिटीज, मोटापे, पारिवारिक जीन्स (Genes) और ग्लूकोस इंटोलरेंस(Glucose Intolerance)  के इतिहास के कारण हो सकती है। इसका इलाज गर्भावस्था के दौरान इंसुलिन(insulin) के माध्यम से किया जाता है अथवा खान-पान और व्यायाम की सलाह दी जाती है।

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           डायबिटीज के इलाज और बचाव के बारे में अगले अंक में बात करेंगे, तब तक स्वस्थ(Healthy)  और सुन्दर(Beautiful) बने रहें।

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